अध्याय 167 जेसन का इकबालिया बयान

खाने के दौरान सारा ने अपना गिलास उठाया, उसकी मुस्कान उजली और सच्ची थी।

“बधाई हो, एला,” उसने गर्मजोशी से कहा। “आख़िरकार तुम्हारा बदला पूरा हो गया।”

एला ने भी गिलास उठाकर जवाब दिया, मगर उसकी मुस्कान में हल्की-सी भारीपन की परछाईं थी। “फिर भी… मेरी माँ तो चली गईं। वो कमी कोई नहीं भर सकता।”

उसकी आँखो...

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